फरीदाबाद मास्टर प्लान-2041: शहरी की सीमा बढ़ जाएगी 2 किमी, कई गांव आएँगे परिधि में 

  • फरीदाबाद मास्टर प्लान-2041: शहरी की सीमा बढ़ जाएगी 2 किमी, कई गांव आएँगे परिधि में ,
  • मास्टर प्लान-2041 में बड़ा बदलाव,
  • फरीदाबाद में अब फैलेगा शहर,
  • फरीदाबाद के विस्तार का नया खाका तैयार,
  • फरीदाबाद का शहरी दायरा 2 किलोमीटर बढ़ाने की तैयारी,
  • यमुना से पलवल सीमा तक विकास की बढ़ेगी रफ्तार,
  • मास्टर प्लान-2041 में कई गांवों को जोड़ने की तैयारी,
  • इन गांवों पर टिकी नजर,
  • आवासीय-औद्योगिक विकास को मिलेगी जमीन,
  • जेवर एयरपोर्ट और मंझावली पुल से बदलेगा फरीदाबाद का विकास नक्शा,

 

फरीदाबाद: शहर के तेजी से बढ़ते विस्तार और आने वाले वर्षों में आवासीय, औद्योगिक तथा व्यावसायिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फरीदाबाद के शहरी दायरे को करीब दो किलोमीटर तक बढ़ाने की तैयारी चल रही है। फरीदाबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एफएमडीए) मौजूदा कंट्रोल एरिया के विस्तार की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है। इसके लिए राजस्व रिकॉर्ड, जमीन की स्थिति और संबंधित क्षेत्रों का सर्वे किया जा रहा है। प्रस्तावित बदलाव फरीदाबाद के Master Plan-2041 के तहत शहर के भविष्य के विकास की दिशा तय कर सकता है।

कंट्रोल एरिया बढ़ाने के पीछे क्या है मकसद

शहरी सीमा के आसपास तेजी से हो रहे निर्माण को योजनाबद्ध तरीके से नियंत्रित करना इस पूरी कवायद का अहम हिस्सा माना जा रहा है। मौजूदा शहर के बाहर यदि निर्माण गतिविधियां बिना किसी स्पष्ट योजना के बढ़ती हैं तो भविष्य में सड़क, सीवरेज, ड्रेनेज, पानी, पार्क और अन्य सुविधाओं को विकसित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इसी वजह से प्रस्तावित नए क्षेत्रों में पहले से ही Land Use निर्धारित करने की योजना है। इससे यह तय किया जा सकेगा कि किस हिस्से में आवासीय गतिविधियां होंगी, कहां उद्योग विकसित होंगे और किन स्थानों पर व्यावसायिक गतिविधियों या सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन रखी जाएगी।

हरियाणा में फरीदाबाद-पलवल के आसपास हाईवे कॉरिडोर और नियंत्रित क्षेत्रों में नियोजित विकास की अवधारणा पहले से मौजूद है। एनसीआर के ड्राफ्ट रीजनल प्लान-2041 में भी फरीदाबाद-पलवल से होकर गुजरने वाले प्रमुख कॉरिडोर को नियंत्रित विकास के संदर्भ में चिन्हित किया गया है।

पूर्व और दक्षिण की ओर बढ़ेगा शहर

फरीदाबाद के भौगोलिक स्वरूप को देखते हुए भविष्य में शहर के विस्तार की प्रमुख दिशा पूर्व और दक्षिण की ओर रहने की संभावना है। उत्तर दिशा में दिल्ली की सीमा है, जबकि पश्चिमी हिस्से में अरावली क्षेत्र के कारण विकास की संभावनाएं सीमित हैं।

ऐसे में ग्रेटर फरीदाबाद से आगे यमुना क्षेत्र और पलवल सीमा की ओर स्थित इलाकों का महत्व बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में पहले से ही सड़क संपर्क, एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित परिवहन परियोजनाओं के कारण भविष्य के विकास की संभावनाएं देखी जा रही हैं।

एफएमडीए के मास्टर प्लान-2041 से जुड़ी पिछली योजनाओं में भी यमुना क्षेत्र, जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी और फरीदाबाद-पलवल क्षेत्र के नियोजित विकास पर जोर दिया गया है।

इन गांवों को नए शहरी क्षेत्र में शामिल करने पर विचार

प्रस्तावित विस्तार के तहत तिगांव, खेड़ी कलां, नचौली, जसाना, बदरपुर सैद, साहूपुरा, सोतई, सीकरी और कैली समेत आसपास के गांवों को नए शहरी दायरे में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

हालांकि अभी इन गांवों को अंतिम रूप से मास्टर प्लान में शामिल किया गया है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। अधिकारियों और संबंधित विभागों की ओर से सर्वे और रिकॉर्ड के अध्ययन के बाद ही वास्तविक सीमा तय होगी।

ड्राफ्ट मास्टर प्लान सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन गांवों या राजस्व क्षेत्रों को प्रस्तावित विस्तार में शामिल किया जाता है और वहां किस प्रकार की विकास गतिविधियों की अनुमति दी जाती है।

पलवल सीमा के पास औद्योगिक गतिविधियों की संभावना

फरीदाबाद के दक्षिणी हिस्से में बल्लभगढ़-पलवल क्षेत्र को औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रमुख एक्सप्रेसवे और परिवहन मार्गों के आसपास भविष्य में वेयरहाउस, मैन्युफैक्चरिंग तथा ऑटोमोबाइल से जुड़े उद्योगों के लिए नियोजित क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं।

पृथला, सीकरी, झारसांतली, बघौला, बगपुर, असावटी, पियाला और हरफली समेत आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की संभावनाएं बताई जा रही हैं।

इन क्षेत्रों की सबसे बड़ी विशेषता प्रमुख परिवहन मार्गों से उनकी कनेक्टिविटी है। एक्सप्रेसवे के आसपास उद्योग और लॉजिस्टिक्स केंद्र विकसित होने से माल परिवहन को सुविधा मिल सकती है। इससे रोजगार और सहायक कारोबारी गतिविधियों के बढ़ने की संभावना भी बनेगी।

एफएमडीए की योजना में फरीदाबाद और पलवल से जुड़े क्षेत्रों को व्यापक महानगरीय विकास की दृष्टि से देखने की दिशा पहले भी सामने आ चुकी है। जेवर एयरपोर्ट के विकास के साथ इस पूरे क्षेत्र में नए कनेक्टिविटी कॉरिडोर और आर्थिक गतिविधियों की संभावनाएं बढ़ी हैं।

यमुना पट्टी और मंझावली क्षेत्र पर भी नजर

पूर्वी फरीदाबाद में ग्रेटर फरीदाबाद से आगे यमुना पट्टी के क्षेत्रों को भी भविष्य के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंझावली, चिरसी, छांयसा, पल्ला, अगवानपुर, अटाली, मच्छगर, दयालपुर और फतेहपुर तगा जैसे गांवों के आसपास आवासीय तथा व्यावसायिक गतिविधियों के लिए संभावनाएं देखी जा रही हैं।

मंझावली पुल के निर्माण और नोएडा तथा जेवर एयरपोर्ट की ओर बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से इस क्षेत्र की पहुंच और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में आने वाले वर्षों में यमुना के आसपास के इलाकों में जमीन के इस्तेमाल और विकास गतिविधियों को लेकर नियोजन की जरूरत और बढ़ सकती है।

एफएमडीए के 2041 विजन में यमुना क्षेत्र के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और नियोजित शहरीकरण को महत्वपूर्ण विषयों में शामिल किया गया है। पहले से सामने आई योजनाओं में यमुना रिवरफ्रंट और फरीदाबाद-जेवर क्षेत्र में नए आवासीय हब जैसी अवधारणाओं का भी उल्लेख किया गया है।

आवासीय क्षेत्रों के साथ सड़क और सीवरेज की योजना

मास्टर प्लान-2041 में केवल जमीन को आवासीय या औद्योगिक उपयोग के लिए चिन्हित करना ही उद्देश्य नहीं होगा। नए शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के लिए भी पहले से प्रावधान किया जाना प्रस्तावित है।

सड़कों के नेटवर्क के साथ सीवरेज, ड्रेनेज, पार्क, ग्रीन बेल्ट और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन चिन्हित की जाएगी। इससे भविष्य में कॉलोनियों और औद्योगिक क्षेत्रों के विकसित होने के बाद बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकेगा।

फरीदाबाद के मौजूदा विकास योजनाओं में भी नियंत्रित क्षेत्रों और भूमि उपयोग की योजना का प्रावधान रहा है। हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय विभाग की वेबसाइट पर फरीदाबाद के नियंत्रित क्षेत्रों से जुड़े विकास प्लान और अन्य नियोजन दस्तावेज उपलब्ध हैं। (ULB Haryana)

अरावली और हरित क्षेत्रों को रखा जाएगा अलग

शहर के विस्तार के साथ पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण रहेगी। अरावली और हरित संरक्षित क्षेत्रों को सामान्य शहरी विकास से अलग रखने पर जोर रहेगा।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए निर्माण और आधारभूत ढांचे के विस्तार के दौरान प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

नए क्षेत्रों में विकास की अनुमति देने से पहले उनके मौजूदा भू-उपयोग, पर्यावरणीय स्थिति और संबंधित नियामकीय प्रावधानों का अध्ययन किया जाना जरूरी होगा। इसी वजह से राजस्व रिकॉर्ड और जमीनी सर्वे की प्रक्रिया को अहम माना जा रहा है।

ड्राफ्ट जारी होने के बाद तस्वीर होगी साफ

फिलहाल प्रस्तावित शहरी विस्तार को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। एफएमडीए की ओर से सर्वे और रिकॉर्ड के अध्ययन के बाद Draft Master Plan तैयार किया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव को संबंधित स्तर पर मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मास्टर प्लान-2041 लागू हो सकेगा। इससे पहले किन गांवों को शामिल किया जाएगा, किन क्षेत्रों का लैंड यूज बदलेगा और किस स्थान पर आवासीय, औद्योगिक या व्यावसायिक विकास की अनुमति होगी, इस पर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं होगी।

इसलिए फिलहाल प्रस्तावित गांवों और क्षेत्रों को संभावित दायरे के रूप में देखा जा रहा है। अंतिम निर्णय आधिकारिक ड्राफ्ट और उसके बाद होने वाली सरकारी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

फरीदाबाद के भविष्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण है विस्तार

यदि प्रस्तावित विस्तार योजना मंजूर होती है तो फरीदाबाद का विकास मौजूदा शहरी सीमा से बाहर अधिक योजनाबद्ध तरीके से किया जा सकेगा। ग्रेटर फरीदाबाद, यमुना क्षेत्र और पलवल सीमा के आसपास पहले से बढ़ती गतिविधियों को एक व्यापक योजना के तहत लाने में मदद मिल सकती है।

औद्योगिक क्षेत्रों को एक्सप्रेसवे और प्रमुख परिवहन मार्गों के आसपास विकसित करने से लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं, यमुना पट्टी और मंझावली क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी के साथ आवासीय और व्यावसायिक विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

हालांकि, इस विस्तार का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम मास्टर प्लान में जमीन का उपयोग किस तरह निर्धारित किया जाता है और सड़क, पानी, सीवरेज, ड्रेनेज तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को किस स्तर तक शामिल किया जाता है।

फिलहाल एफएमडीए का सर्वे और राजस्व रिकॉर्ड का अध्ययन आगे की योजना का आधार तैयार कर रहा है। ड्राफ्ट मास्टर प्लान जारी होने के बाद ही फरीदाबाद के नए शहरी दायरे और इसमें शामिल होने वाले गांवों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

 

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